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किसी जानलेवा बीमारी का संकेत हो सकता है महिलाओं में नाभि के नीचे का दर्द, जानें इसकी वजहें

Published by Popxo

महिलाओं को अक्सर पेट के निचले हिस्से में यानि नाभि के निचले हिस्से में दर्द होता है, लेकिन वो इसे नजरंदाज कर देती हैं या फिर इसे सामान्य दर्द मानते हुए दर्द की गोली खाकर इसका इलाज कर लेती हैं। लेकिन यह हमेशा साधारण दर्द ही हो, ऐसा नहीं है। नाभि के नीचे होने वाला दर्द ज्यादातर मामलों में किसी न किसी समस्या या बीमारी का संकेत होता है। महिलाओं में यह आंतरिक जनन अंगों की किसी विकृति का संकेत हो सकता है, जिसकी वजह से पेट के निचले हिस्से में दर्द होने लगता है। इसके पीछे छिपी समस्याओं में एंडोमीट्रियोसिस, पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिज़ीज़ (पीआईडी), इक्टोपिक प्रेगनेंसी, ओवेरियन टॉर्शन एवं फटी हुई ओवेरियन सिस्ट जैसी जानलेवी बीमारी शामिल हैं।

क्रॉनिक पेन है या एक्यूट

अगर आपको कुछ दिनों तक लगातार नाभि के नीचे दर्द हो रहा है तो जल्द ही किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाएं। ऐसे में डॉक्टर यह अनुमान लगाएगा कि यह दर्द क्रोनिक यानि दीर्घकालिक है या फिर एक्यूट या तीव्र प्रकट होने वाला है। यदि दर्द के लक्षण लगातार बढ़ रहे हैं और यह छह महीने से ज्यादा समय से हैं, तो यह दर्द क्रोनिक होता है। लेकिन यदि दर्द अचानक उठता है और कुछ दिनों तक बना रहता है, तो बढ़ने की स्थिति में भी इसे एक्यूट कहा जा सकता है। क्रोनिक पेल्विक पेन हर 6 में से 1 महिला को प्रभावित करती है और यह काफी तकलीफदायी भी हो सकती है। इससे महिलाओं के दैनिक कार्य प्रभावित होते हैं और यह अवसाद भी पैदा कर सकती है। कभी कभी किसी एक कारण की बजाय शारीरिक, मानसिक और/ या सामाजिक कारणों से भी यह पीड़ा हो सकती है।

1.मूत्र प्रणाली के कारणों से : मूत्र प्रणाली के विकार, जैसे ब्लैडर या किडनी की समस्या
2. पाचन तंत्र के विकार : आंत की समस्या
3. गायनोकोलॉजिकल समस्याएं : जनन अंग, जैसे यूटिरस, फैलोपियन ट्यूब्स एवं ओवरी की समस्या

यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन

एक बहुत आम समस्या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) की है। इस विकार में बार बार पेशाब करने की इच्छा एवं पेशाब करते समय दर्द या जलन महसूस होती है। यूटीआई के लक्षण तेज़ बुखार और पीठ में तेज दर्द है। इस इंफेक्शन का इलाज जल्दी से जल्दी कराना जरूरी होता है, क्योंकि यह इंफेक्शन किडनी तक फैलकर उन्हें खराब कर सकता है।

मूत्र प्रणाली से जुड़ा क्रोनिक दर्द

मूत्र प्रणाली से जुड़े क्रोनिक दर्द इंटरस्टीशियल सिस्टिसिस या पीड़ादायक ब्लैडर सिंड्रोम के हो सकते हैं, जो इंफेक्शन तो नहीं हैं, लेकिन इनके लिए विविध शैलियों के इलाज की जरूरत होती है।

कभी कभी किडनी की पथरी से पीठ में दर्द होता है, जो नीचे श्रोणिस्थल तक फैल जाता है। पेशाब में थोड़ा खून भी आ सकता है। छोटी पथरी खुद ही बाहर निकल जाती है, लेकिन बड़ी पथरी के लिए कभी कभी सर्जिकल इलाज की जरूरत हो सकती है।

आंत की समस्या के कारण होने वाला दर्द

आंत की समस्या के कारण होने वाला दर्द कब्ज, दस्त, पेट फूलने या गैस की वजह से हो सकता है। यह दर्द पेट के अलग अलग हिस्सों में स्थानांतरित होता रहता है और लहर के रूप में आता- जाता है। टट्टी करने के बाद इस दर्द से आम तौर पर राहत मिल जाती है।

इरीटेबल बॉवल सिंड्रोम

युवा महिलाओं में इरीटेबल बॉवल सिंड्रोम (आईबीएस) भी एक आम समस्या है, जिससे बार-बार दस्त, कब्ज और पेट फूलने की शिकायत होती है। यह तनाव एवं खाने- पीने की अनियमित आदतों के कारण होता है। वृद्धावस्था में बॉवल में परिवर्तन या टट्टी में खून को नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अनेक मामलों में यह केवल इन्फ्लेमेटरी बॉवल डिज़ीज़ हो सकती है, लेकिन कभी कभी यह कोलोरेक्टल कैंसर के कारण भी हो सकता है।

गायनोकोलॉजिकल समस्या

लगभग 20 प्रतिशत मामलों में पेट के निचले हिस्से में दर्द गायनोकोलॉजिकल समस्या के कारण हो सकता है। ऐसी स्थिति में दर्द यूटेरस, फैलोपियन ट्यूब्स या ओवरी से शुरू हो सकता है।

एंडोमीट्रियोसिस के कारण

माहवारी या संभोग के दौरान होने वाला दर्द एंडोमीट्रियोसिस के कारण भी हो सकता है। यदि आपको भी ऐसा दर्द होता है, तो अपने डॉक्टर को जरूर बतलाएं। एंडोमीट्रियोसिस में कोख की अंदरूनी सतह के टिश्यू यूटेरस से बाहर निकलने लगते हैं। माहवारी के दौरान यह दर्द ज्यादा पीड़ादायक हो जाता है और इसके साथ काफी मात्रा में रक्तस्राव होता है। यह समस्या 30 साल के आसपास ही प्रारंभ होती है।

फाइब्रॉयड के कारण

पेट के निचले हिस्से में दर्द के साथ भारी मात्रा में माहवारी का एक आम कारण फाईब्रॉयड भी है। इनकी जांच अल्ट्रासाउंड द्वारा आसानी से हो जाती है और अधिकांश मामलों में बिना किसी बड़ी सर्जरी के इनका इलाज हो जाता है।

ओवेरियन सिस्ट के कारण

ओवेरियन सिस्ट कभी कभी किनारों पर तेज दर्द करती हैं। यदि ये ट्विस्टेड होती हैं, तो एक्यूट दर्द होता है, जिसके लिए कई बार इमरजेंसी सर्जरी की भी जरूरत पड़ जाती है। इसमें इन्हें खोलकर ओवरी को स्थायी क्षति होने से बचाया जाता है।

पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिज़ीज़

दर्द का एक कारण पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिज़ीज़ (पीआईडी) भी हो सकती है। यह यौन संक्रमण का ही एक प्रकार है। यह संक्रमण फैलोपियन ट्यूब्स और/या पेल्विस में होता है। इसकी वजह से प्रजनन अंगों में चिपकाव या फिर स्थायी क्षति हो सकती है। इसलिए सही इलाज के लिए जल्द से जल्द आपको गायनोकोलॉजिस्ट के पास जाना चाहिए। यदि दर्द लंबे समय तक चलता है और माहवारी से जुड़ा है, तो आपकी डॉक्टर गोलियों, इंजेक्शनया इंट्रायूटेराईन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाईस (आईयूसीडी) द्वारा आपको हॉर्मोन के इलाज का परामर्श दे सकती है।

प्रेगनेंसी का शुरूआती चरण

दर्द गर्भावस्था के शुरुआती चरण से जुड़ी समस्याओं के कारण भी हो सकता है। इन समस्याओं में गर्भपात या फिर इक्टोपिक गर्भ शामिल है। यदि आपको अपनी माहवारी में कोई बदलाव, जैसे माहवारी चूक जाने के साथ दर्द, या माहवारी देर से होने के साथ भारी रक्तस्राव या फिर माहवारी के चक्र में अचानक परिवर्तन दिखाई देता है, तो आप फौरन अपनी गायनोकोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

पेट की मसल्स में दर्द (फाईब्रोमायल्जिया)

कभी कभी दर्द पेट की अंदरूनी पेषियों यानि मसल्स में भी उत्पन्न होता है। यह समस्या आम तौर पर पेट की मसल्स के छोटे से क्षेत्र की कमजोरी की वजह से होती है। मसल्स के इन कमजोर बिंदुओं को ट्रिगर पॉइंट कहते हैं।

एक तरह का क्रोनिक दर्द कनेक्टिव टिश्यू की संरचनाओं को प्रभावित करता है, जिनमें मसल्स, लिगामेंट और टेंडन हैं। इसे फाईब्रोमायल्जिया कहते हैं। इस स्थिति में शरीर के विशेष हिस्सों में कमजोरी और पेषियों में विस्तृत दर्द महसूस होता है। यदि आपको होने वाला दर्द फाईब्रोमायल्जिया के कारण है, तो आपको थकावट, अनियमित नींद, सिरदर्द और मूड में बदलाव, जैसे अवसाद व चिंता महसूस होगी।

नाभि के नीचे के दर्द का इलाज

पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द का इलाज इस दर्द के कारण पर निर्भर करता है। कुछ स्थितियों, जैसे एपेंडिसाईटिस या ओवेरियन टॉर्शन के लिए सदैव सर्जरी (ओपन या लैप्रोस्कोपिक) की जरूरत होती है, जबकि अन्य संक्रमणों का इलाज दवाई से हो सकता है। इस दर्द से संबंधित जरूरी बात यह है कि यदि इस स्थान पर दर्द लगातार बना रहता है और लम्बे समय तक होता है, तो इसे नजरंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर मेडिकल सहायता लेनी चाहिए। अगर आपने ऐसा नहीं किया तो यह समस्या कई बार जानलेवा रूप भी ले सकती है।

(डॉ. आस्था दयाल, ऑब्सटीट्रिक्स एवं गायनोकोलॉजिस्ट, सीके बिरला हॉस्पिटल फॉर वुमन, गुड़गांव से बातचीत पर आधारित)

 

 
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